Ashfaqullah Khan - निर्भय क्रांतिकारी अशफ़ाक उल्ला खान

अशफ़ाक उल्ला खां का जीवन परिचय

अंग्रेजी शासन से देश को आजाद कराने के लिए अपने प्राणों की आहुति देने वाले अशफ़ाक उल्ला खां ना सिर्फ एक निर्भय और प्रमुख स्वतंत्रता सेनानी थे बल्कि उर्दू भाषा के एक बेहतरीन कवि भी थे. पठान परिवार से संबंधित अशफ़ाक उल्ला खां का जन्म 22 अक्टूबर, 1900 को शाहजहांपुर, उत्तर प्रदेश में हुआ था. अशफ़ाक उल्ला खां ने स्वयं अपनी डायरी में यह लिखा है कि जहां उनके पिता के परिवार में कोई भी स्नातक की पढ़ाई पूरी नहीं कर सका वहीं उनके ननिहाल में सभी लोग उच्च-शिक्षित और ब्रिटिश सरकार के अधीन प्रमुख पदों पर कार्यरत थे. चार भाइयों में अशफ़ाक सबसे छोटे थे. इनके बड़े भाई रियायत उल्ला खां, राम प्रसाद ‘`बिस्मिल`‘ के सहपाठी थे. जिस समय अंग्रेजी सरकार द्वारा बिस्मिल को भगोड़ा घोषित किया गया था, तब रियायत, अपने छोटे भाई अशफ़ाक को उनके कार्यों और शायरी के विषय में बताया करते थे. भाई की बात सुनकर ही अशफ़ाक के भीतर राम प्रसाद बिस्मिल से मिलने की तीव्र इच्छा विकसित हुई. लेकिन इस समय इसका कारण सिर्फ शायरी था. आगे चलकर दोनों के बीच दोस्ती का गहरा संबंध विकसित हुआ. अलग-अलग धर्म के अनुयायी होने के बावजूद दोनों में गहरी और निःस्वार्थ मित्रता थी. 1920 में जब बिस्मिल वापिस शाहजहांपुर आ गए थे, तब अशफ़ाक ने उनसे मिलने की बहुत कोशिश की, पर बिस्मिल ने इस ओर कोई ध्यान नहीं दिया. वर्ष 1922 में जब असहयोग आंदोलन की शुरूआत हुई तब बिस्मिल द्वारा आयोजित सार्वजनिक सभाओं में भाग लेकर अशफ़ाक उनके संपर्क में आए. शुरूआत में उनका संबंध शायरी और मुशायरों तक ही सीमित था. अशफ़ाक उल्ला खां अपनी शायरी सबसे पहले बिस्मिल को ही दिखाते थे.

राम प्रसाद बिस्मिल से दोस्ती

चौरी-चौरा कांड के बाद जब महात्मा गांधी ने अपना असयोग आंदोलन वापस ले लिया था, तब हजारों की संख्या में युवा खुद को धोखे का शिकार समझ रहे थे. अशफ़ाक उल्ला खां उन्हीं में से एक थे. उन्हें लगा अब जल्द से जल्द भारत को अंग्रेजों की गुलामी से मुक्ति मिलनी चाहिए. इस उद्देश्य के साथ वह शाहजहांपुर के प्रतिष्ठित और समर्पित क्रांतिकारी राम प्रसाद बिस्मिल के साथ जुड़ गए. आर्य समाज के एक सक्रिय सदस्य और समर्पित हिंदू राम प्रसाद बिस्मिल अन्य धर्मों के लोगों को भी बराबर सम्मान देते थे. वहीं दूसरी ओर एक कट्टर मुसलमान परिवार से संबंधित अशफ़ाक उल्ला खां भी ऐसे ही स्वभाव वाले थे. धर्मों में भिन्नता होने के बावजूद दोनों का मकसद सिर्फ देश को स्वराज दिलवाना ही था. यही कारण है कि जल्द ही अशफ़ाक, राम प्रसाद बिस्मिल के विश्वासपात्र बन गए. धीरे-धीरे इनकी दोस्ती भी गहरी होती गई.

काकोरी कांड

जब क्रांतिकारियों को यह लगने लगा कि अंग्रेजों से विनम्रता से बात करना या किसी भी प्रकार का आग्रह करना फिजूल है तो उन्होंने विस्फोटकों और गोलीबारी का प्रयोग करने की योजना बनाई. इस समय जो क्रांतिकारी विचारधारा विकसित हुई वह पुराने स्वतंत्रता सेनानियों और गांधी जी की विचारधारा से बिलकुल उलट थी. लेकिन इन सब सामग्रियों के लिए अधिकाधिक धन की आवश्यकता थी. इसीलिए राम प्रसाद बिस्मिल ने अंग्रेजी सरकार के धन को लूटने का निश्चय किया. उन्होंने सहारनपुर-लखनऊ 8 डाउन पैसेंजर ट्रेन में जाने वाले धन को लूटने की योजना बनाई. 9 अगस्त, 1925 को राम प्रसाद बिस्मिल के नेतृत्व में अशफ़ाक उल्ला खां समेत आठ अन्य क्रांतिकारियों ने इस ट्रेन को लूटा.

काकोरी कांड में फांसी

जब अंग्रेजी सरकार को क्रांतिकारी गतिविधियों से भय लगने लगा तो उन्होंने बिना सोचे-समझे क्रांतिकारियों की धर-पकड़ शुरू कर दी. इस दौरान राम प्रसाद बिस्मिल अपने साथियों के साथ पकड़े गए लेकिन अशफ़ाक उल्ला खां उनकी पकड़ में नहीं आए. पहले वह बनारस गए और फिर बिहार जाकर लगभग दस महीने तक एक इंजीनियरिंग कंपनी में कार्य करते रहे. वे लाला हर दयाल से मिलने के लिए देश से बाहर भी जाना चाहते थे. इसीलिए वह अपने दोस्त के पास दिल्ली आ गए ताकि यहां से विदेश जाने का रास्ता ढूंढ पाएं. लेकिन उनके दोस्त ने उनके साथ विश्वासघात कर पुलिस को उनकी सूचना दे दी. पुलिस ने अशफ़ाक को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया. जेल अधिकारी तसद्दुक हुसैन ने धर्म का सहारा लेकर बिस्मिल और अशफ़ाक की दोस्ती तोड़ने की कोशिश की, पर इससे कोई लाभ हासिल नहीं हुआ. अशफ़ाक उल्ला खां को फैजाबाद जेल में रखकर कड़ी यातनाएं दी गईं. काकोरी कांड में चार लोगों को फांसी की सजा सुनाई गई जिनमें राम प्रसाद बिस्मिल, अशफ़ाक उल्ला खां शामिल थे. 19 दिसंबर, 1927 को एक ही दिन एक ही समय लेकिन अलग-अलग जेलों (फैजाबाद और गोरखपुर) में दो दोस्तों, राम प्रसाद बिस्मिल और अशफ़ाक उल्ला खां, को फांसी दे दी गई.

अशफ़ाक उल्ला खां एक बहुत अच्छे कवि थे. अपने उपनाम वारसी और हसरत से वह शायरी और गजलें लिखते थे. लेकिन वह हिंदी और अंग्रेजी में भी लिखते थे. अपने अंतिम दिनों में उन्होंने कुछ बहुत प्रभावी पंक्तियां लिखीं, जो उनके बाद स्वतंत्रता के लिए संघर्ष कर रहे लोगों के लिए मार्गदर्शक साबित हुईं.

किये थे काम हमने भी जो कुछ भी हमसे बन पाए, ये बातें तब की हैं आज़ाद थे और था शबाब अपना; मगर अब तो जो कुछ भी हैं उम्मीदें बस वो तुमसे हैं, जबां तुम हो, लबे-बाम आ चुका है आफताब अपना।

जाऊंगा खाली हाथ मगर ये दर्द साथ ही जायेगा, जाने किस दिन हिन्दोस्तान आज़ाद वतन कहलायेगा? बिस्मिल हिन्दू हैं कहते हैं "फिर आऊंगा, फिर आऊंगा,फिर आकर के ऐ भारत मां तुझको आज़ाद कराऊंगा". जी करता है मैं भी कह दूँ पर मजहब से बंध जाता हूँ, मैं मुसलमान हूं पुनर्जन्म की बात नहीं कर पाता हूं; हां खुदा अगर मिल गया कहीं अपनी झोली फैला दूंगा, और जन्नत के बदले उससे यक पुनर्जन्म ही माँगूंगा

Adolf Hitler Quotes and Thoughts in Hindi

v  विजेता से कभी नहीं पूछा जायेगा कि क्या उसने सच कहा था।

v  महान असत्यवादी महान जादूगर भी होते हैं।

v  कुशल और निरंतर प्रचार के ज़रिये, कोई लोगों को स्वर्ग भी नर्क की तरह दिखाया जा  सकता है या एक बिलकुल मनहूस जीवन को स्वर्ग की तरह दिखाया जा  सकता है।



v  कोई इंसान बिना किसी कठिनाई के जीतता है तो यह केवल एक विजय है; लेकिन यदि कोई इंसान बहुत सी कठिनाइयों के बावजूद जीतता है तो यह इतिहास है।

v  यदि आप एक बड़ा झूठ बोलते हैं और उसे अक्सर बोलते हैं तो उस पर यकीन कर लिया जायेगा।

v  शक्ति बचाव में नहीं आक्रमण में निहित है।

v  लोगों का बड़ा समूह छोटे झूठ की अपेक्षा बड़े झूठ का आसानी से शिकार बन जाता है।



v  मुझे ये नहीं समझ आता कि इंसान प्रकृति के जितना ही क्रूर क्यों नहीं हो सकता।

v  नफ़रत नापसंदगी की तुलना में अधिक स्थायी होती है।

v  वो सत्य नहीं है जो मायने रखता है, बल्कि वो जीत है।

v  कितना भाग्यापूर्ण है उन सरकारों के लिए कि जिन लोगों पर वो शासन करते हैं वे सोचते नहीं।

v  शब्द अज्ञात क्षेत्रों में पुल का निर्माण करते हैं।

v  हमेशा ही विश्वास के खिलाफ लड़ना ज्ञान के खिलाफ लड़ने से अधिक कठिन होता है।

v  जो कोई भी आकाश को हरा और मैदान को नीला देखता या पेंट करता है उसे मार देना चाहिए।

v  चुनाव के माध्यम से एक महान व्यक्ति खोजने से पहले एक ऊंट सुई की आंख से निकल जायेगा।

v  केवल वही, जो युवाओं का मालिक होता है, भविष्य में लाभ उठता है।

v  सभी महान आन्दोलन लोक्रप्रिय आन्दोलन होते हैं। वे मानवीय जूनून और भावनाओं का विस्फोट होते हैं, जो कि विनाश की देवी या  लोगों के बीच बोले गए शब्दों की मशाल के द्वारा क्रियान्वित किये जाते हैं।

v  जर्मनी या तो एक विश्व-शक्ति होगा या फिर होगा ही नहीं।

v  मानवतावाद मूर्खता और कायरता की अभिव्यक्ति है।

v  सभी प्रचार लोकप्रिय होने चाहिए और इन्हें जिन तक पहुचाना है उनमे से सबसे कम बुद्धिमान व्यक्ति के भी समझ में आने चाहियें।

v  एक ईसाई होने के नाते मुझे खुद को ठगे जाने से बचाने का कोई कर्तव्य नहीं है, लेकिन सत्य और न्याय के लिए लड़ने का मेरा कर्तव्य है।

v  जनरलस सोचते हैं कि युद्ध मध्य युग की खेल-कूद प्रतियोगिताएं की तरह छेड़े जाने चाहिए। मुझे शूरवीरों का कोई काम नहीं है, मुझे क्रांतिकारी चाहियें।

v  व्यक्तिगत ख़ुशी के दिन बीत चुके हैं।

v  व्यापक जनसँख्या किसी और ताकत से अधिक भाषण की अपील के प्रति संवेदनशील होती है।

v  संघर्ष सभी चीजों का जनक है। जानवरों की दुनिया में इंसान मानवता के सिद्धांत से जीता या खुद को बचाता  आश्चर्य, भय, तोड़-फोड़, हत्या के ज़रिये दुश्मन को अन्दर से हतोत्साहित कर दो। यह भविष्य का युद्ध है।

v  यूनीवर्सल एजुकेशन सबसे अधिक नुक्सान पहुंचाने वाला ज़हर है जिसका उदारवाद ने अपने विनाश के लिए आविष्कार किया है।

v  मैं ज्यादातर लोगों के लिए भावना का प्रयोग करता हूँ और कुछ के लिए कारण बचा कर रखता हूँ।

v  अगर आज मैं यहाँ एक क्रांतिकारी के रूप में खड़ा होता हूँ तो यह क्रांति के खिलाफ एक क्रांतिकारी के खड़े होने के सामान होगा।

v  नेतृत्व की कलाएक एकल दुश्मन के खिलाफ लोगों का ध्यान संगठित करने और यह सावधानी बरतने में है कि कुछ भी इस ध्यान को तोड़ पाए।

v  किसी देश का नाश केवल जूनून के तूफ़ान से रोका जा सकता है, लेकिन केवल वो जो खुद जुनूनी होते हैं दूसरों में जूनून पैदा कर सकते हैं।

v  जो जीना चाहते हैं उन्हें लड़ने दो और जो अनंत संघर्ष वाली इस दुनिया में नहीं लड़ना चाहते हैं उन्हें जीने का अधिकार नहीं है।

v  जो कोई भी यूरोप में युद्ध की मशाल जलाता है वो कुछ और नहीं बस अराजकता की कामना कर सकता है।

v  किसी देश को जितने के लिए सबसे पहले उसके नागरिकों को काबू में करो।

v  पहले वो आपको इग्नोर करेंगे, फिर वो आप  हंसेंगे, फिर वो आप से लड़ेंगे, तब आप जीतोगे।

v  यदि आप जीतते है तो आप को कुछ भी एक्सप्लेन करने की जरूरत नहीं होती है लेकिन यदि आप हार जाते है तो आपको वहां एक्सप्लेन करने के लिए नहीं होना चाहिए।

v  मैं केवल उस चीज़ के लिए लड़ सकता हूँ जिसे मैं प्यार करता हूँ, उसे प्यार करता हूँ जिसे मैं आदर देता हूँऔर उसे आदर देता हूँ जो मैं जानता हूँ।

v  मेरा मानना ​​है कि आज मेरा आचरण सर्वशक्तिमान निर्माता की इच्छा के अनुसार है।


v  कोई भी निर्णय लेने के पहले हज़ारों बार सोचो पर एक बार निर्णय लेने के बाद कभी उसे मत पलटो चाहे इसके लिए आपको हज़ारों तकलीफे उठानी पड़े।v  विजेता से कभी नहीं पूछा जायेगा कि क्या उसने सच कहा था।

v  महान असत्यवादी महान जादूगर भी होते हैं।

v  कुशल और निरंतर प्रचार के ज़रिये, कोई लोगों को स्वर्ग भी नर्क की तरह दिखाया जा  सकता है या एक बिलकुल मनहूस जीवन को स्वर्ग की तरह दिखाया जा  सकता है।



v  कोई इंसान बिना किसी कठिनाई के जीतता है तो यह केवल एक विजय है; लेकिन यदि कोई इंसान बहुत सी कठिनाइयों के बावजूद जीतता है तो यह इतिहास है।

v  यदि आप एक बड़ा झूठ बोलते हैं और उसे अक्सर बोलते हैं तो उस पर यकीन कर लिया जायेगा।

v  शक्ति बचाव में नहीं आक्रमण में निहित है।

v  लोगों का बड़ा समूह छोटे झूठ की अपेक्षा बड़े झूठ का आसानी से शिकार बन जाता है।



v  मुझे ये नहीं समझ आता कि इंसान प्रकृति के जितना ही क्रूर क्यों नहीं हो सकता।

v  नफ़रत नापसंदगी की तुलना में अधिक स्थायी होती है।

v  वो सत्य नहीं है जो मायने रखता है, बल्कि वो जीत है।

v  कितना भाग्यापूर्ण है उन सरकारों के लिए कि जिन लोगों पर वो शासन करते हैं वे सोचते नहीं।

v  शब्द अज्ञात क्षेत्रों में पुल का निर्माण करते हैं।

v  हमेशा ही विश्वास के खिलाफ लड़ना ज्ञान के खिलाफ लड़ने से अधिक कठिन होता है।

v  जो कोई भी आकाश को हरा और मैदान को नीला देखता या पेंट करता है उसे मार देना चाहिए।

v  चुनाव के माध्यम से एक महान व्यक्ति खोजने से पहले एक ऊंट सुई की आंख से निकल जायेगा।

v  केवल वही, जो युवाओं का मालिक होता है, भविष्य में लाभ उठता है।

v  सभी महान आन्दोलन लोक्रप्रिय आन्दोलन होते हैं। वे मानवीय जूनून और भावनाओं का विस्फोट होते हैं, जो कि विनाश की देवी या  लोगों के बीच बोले गए शब्दों की मशाल के द्वारा क्रियान्वित किये जाते हैं।

v  जर्मनी या तो एक विश्व-शक्ति होगा या फिर होगा ही नहीं।

v  मानवतावाद मूर्खता और कायरता की अभिव्यक्ति है।

v  सभी प्रचार लोकप्रिय होने चाहिए और इन्हें जिन तक पहुचाना है उनमे से सबसे कम बुद्धिमान व्यक्ति के भी समझ में आने चाहियें।

v  एक ईसाई होने के नाते मुझे खुद को ठगे जाने से बचाने का कोई कर्तव्य नहीं है, लेकिन सत्य और न्याय के लिए लड़ने का मेरा कर्तव्य है।

v  जनरलस सोचते हैं कि युद्ध मध्य युग की खेल-कूद प्रतियोगिताएं की तरह छेड़े जाने चाहिए। मुझे शूरवीरों का कोई काम नहीं है, मुझे क्रांतिकारी चाहियें।

v  व्यक्तिगत ख़ुशी के दिन बीत चुके हैं।

v  व्यापक जनसँख्या किसी और ताकत से अधिक भाषण की अपील के प्रति संवेदनशील होती है।

v  संघर्ष सभी चीजों का जनक है। जानवरों की दुनिया में इंसान मानवता के सिद्धांत से जीता या खुद को बचाता  आश्चर्य, भय, तोड़-फोड़, हत्या के ज़रिये दुश्मन को अन्दर से हतोत्साहित कर दो। यह भविष्य का युद्ध है।

v  यूनीवर्सल एजुकेशन सबसे अधिक नुक्सान पहुंचाने वाला ज़हर है जिसका उदारवाद ने अपने विनाश के लिए आविष्कार किया है।

v  मैं ज्यादातर लोगों के लिए भावना का प्रयोग करता हूँ और कुछ के लिए कारण बचा कर रखता हूँ।

v  अगर आज मैं यहाँ एक क्रांतिकारी के रूप में खड़ा होता हूँ तो यह क्रांति के खिलाफ एक क्रांतिकारी के खड़े होने के सामान होगा।

v  नेतृत्व की कलाएक एकल दुश्मन के खिलाफ लोगों का ध्यान संगठित करने और यह सावधानी बरतने में है कि कुछ भी इस ध्यान को तोड़ पाए।

v  किसी देश का नाश केवल जूनून के तूफ़ान से रोका जा सकता है, लेकिन केवल वो जो खुद जुनूनी होते हैं दूसरों में जूनून पैदा कर सकते हैं।

v  जो जीना चाहते हैं उन्हें लड़ने दो और जो अनंत संघर्ष वाली इस दुनिया में नहीं लड़ना चाहते हैं उन्हें जीने का अधिकार नहीं है।

v  जो कोई भी यूरोप में युद्ध की मशाल जलाता है वो कुछ और नहीं बस अराजकता की कामना कर सकता है।

v  किसी देश को जितने के लिए सबसे पहले उसके नागरिकों को काबू में करो।

v  पहले वो आपको इग्नोर करेंगे, फिर वो आप  हंसेंगे, फिर वो आप से लड़ेंगे, तब आप जीतोगे।

v  यदि आप जीतते है तो आप को कुछ भी एक्सप्लेन करने की जरूरत नहीं होती है लेकिन यदि आप हार जाते है तो आपको वहां एक्सप्लेन करने के लिए नहीं होना चाहिए।

v  मैं केवल उस चीज़ के लिए लड़ सकता हूँ जिसे मैं प्यार करता हूँ, उसे प्यार करता हूँ जिसे मैं आदर देता हूँऔर उसे आदर देता हूँ जो मैं जानता हूँ।

v  मेरा मानना ​​है कि आज मेरा आचरण सर्वशक्तिमान निर्माता की इच्छा के अनुसार है।

v  कोई भी निर्णय लेने के पहले हज़ारों बार सोचो पर एक बार निर्णय लेने के बाद कभी उसे मत पलटो चाहे इसके लिए आपको हज़ारों तकलीफे उठानी पड़े।v  विजेता से कभी नहीं पूछा जायेगा कि क्या उसने सच कहा था।

v  महान असत्यवादी महान जादूगर भी होते हैं।

v  कुशल और निरंतर प्रचार के ज़रिये, कोई लोगों को स्वर्ग भी नर्क की तरह दिखाया जा  सकता है या एक बिलकुल मनहूस जीवन को स्वर्ग की तरह दिखाया जा  सकता है।



v  कोई इंसान बिना किसी कठिनाई के जीतता है तो यह केवल एक विजय है; लेकिन यदि कोई इंसान बहुत सी कठिनाइयों के बावजूद जीतता है तो यह इतिहास है।

v  यदि आप एक बड़ा झूठ बोलते हैं और उसे अक्सर बोलते हैं तो उस पर यकीन कर लिया जायेगा।

v  शक्ति बचाव में नहीं आक्रमण में निहित है।

v  लोगों का बड़ा समूह छोटे झूठ की अपेक्षा बड़े झूठ का आसानी से शिकार बन जाता है।



v  मुझे ये नहीं समझ आता कि इंसान प्रकृति के जितना ही क्रूर क्यों नहीं हो सकता।

v  नफ़रत नापसंदगी की तुलना में अधिक स्थायी होती है।

v  वो सत्य नहीं है जो मायने रखता है, बल्कि वो जीत है।

v  कितना भाग्यापूर्ण है उन सरकारों के लिए कि जिन लोगों पर वो शासन करते हैं वे सोचते नहीं।

v  शब्द अज्ञात क्षेत्रों में पुल का निर्माण करते हैं।

v  हमेशा ही विश्वास के खिलाफ लड़ना ज्ञान के खिलाफ लड़ने से अधिक कठिन होता है।

v  जो कोई भी आकाश को हरा और मैदान को नीला देखता या पेंट करता है उसे मार देना चाहिए।

v  चुनाव के माध्यम से एक महान व्यक्ति खोजने से पहले एक ऊंट सुई की आंख से निकल जायेगा।

v  केवल वही, जो युवाओं का मालिक होता है, भविष्य में लाभ उठता है।

v  सभी महान आन्दोलन लोक्रप्रिय आन्दोलन होते हैं। वे मानवीय जूनून और भावनाओं का विस्फोट होते हैं, जो कि विनाश की देवी या  लोगों के बीच बोले गए शब्दों की मशाल के द्वारा क्रियान्वित किये जाते हैं।

v  जर्मनी या तो एक विश्व-शक्ति होगा या फिर होगा ही नहीं।

v  मानवतावाद मूर्खता और कायरता की अभिव्यक्ति है।

v  सभी प्रचार लोकप्रिय होने चाहिए और इन्हें जिन तक पहुचाना है उनमे से सबसे कम बुद्धिमान व्यक्ति के भी समझ में आने चाहियें।

v  एक ईसाई होने के नाते मुझे खुद को ठगे जाने से बचाने का कोई कर्तव्य नहीं है, लेकिन सत्य और न्याय के लिए लड़ने का मेरा कर्तव्य है।

v  जनरलस सोचते हैं कि युद्ध मध्य युग की खेल-कूद प्रतियोगिताएं की तरह छेड़े जाने चाहिए। मुझे शूरवीरों का कोई काम नहीं है, मुझे क्रांतिकारी चाहियें।

v  व्यक्तिगत ख़ुशी के दिन बीत चुके हैं।

v  व्यापक जनसँख्या किसी और ताकत से अधिक भाषण की अपील के प्रति संवेदनशील होती है।

v  संघर्ष सभी चीजों का जनक है। जानवरों की दुनिया में इंसान मानवता के सिद्धांत से जीता या खुद को बचाता  आश्चर्य, भय, तोड़-फोड़, हत्या के ज़रिये दुश्मन को अन्दर से हतोत्साहित कर दो। यह भविष्य का युद्ध है।

v  यूनीवर्सल एजुकेशन सबसे अधिक नुक्सान पहुंचाने वाला ज़हर है जिसका उदारवाद ने अपने विनाश के लिए आविष्कार किया है।

v  मैं ज्यादातर लोगों के लिए भावना का प्रयोग करता हूँ और कुछ के लिए कारण बचा कर रखता हूँ।

v  अगर आज मैं यहाँ एक क्रांतिकारी के रूप में खड़ा होता हूँ तो यह क्रांति के खिलाफ एक क्रांतिकारी के खड़े होने के सामान होगा।

v  नेतृत्व की कलाएक एकल दुश्मन के खिलाफ लोगों का ध्यान संगठित करने और यह सावधानी बरतने में है कि कुछ भी इस ध्यान को तोड़ पाए।

v  किसी देश का नाश केवल जूनून के तूफ़ान से रोका जा सकता है, लेकिन केवल वो जो खुद जुनूनी होते हैं दूसरों में जूनून पैदा कर सकते हैं।

v  जो जीना चाहते हैं उन्हें लड़ने दो और जो अनंत संघर्ष वाली इस दुनिया में नहीं लड़ना चाहते हैं उन्हें जीने का अधिकार नहीं है।

v  जो कोई भी यूरोप में युद्ध की मशाल जलाता है वो कुछ और नहीं बस अराजकता की कामना कर सकता है।

v  किसी देश को जितने के लिए सबसे पहले उसके नागरिकों को काबू में करो।

v  पहले वो आपको इग्नोर करेंगे, फिर वो आप  हंसेंगे, फिर वो आप से लड़ेंगे, तब आप जीतोगे।

v  यदि आप जीतते है तो आप को कुछ भी एक्सप्लेन करने की जरूरत नहीं होती है लेकिन यदि आप हार जाते है तो आपको वहां एक्सप्लेन करने के लिए नहीं होना चाहिए।

v  मैं केवल उस चीज़ के लिए लड़ सकता हूँ जिसे मैं प्यार करता हूँ, उसे प्यार करता हूँ जिसे मैं आदर देता हूँऔर उसे आदर देता हूँ जो मैं जानता हूँ।

v  मेरा मानना ​​है कि आज मेरा आचरण सर्वशक्तिमान निर्माता की इच्छा के अनुसार है।

v  कोई भी निर्णय लेने के पहले हज़ारों बार सोचो पर एक बार निर्णय लेने के बाद कभी उसे मत पलटो चाहे इसके लिए आपको हज़ारों तकलीफे उठानी पड़े।v  विजेता से कभी नहीं पूछा जायेगा कि क्या उसने सच कहा था।

v  महान असत्यवादी महान जादूगर भी होते हैं।

v  कुशल और निरंतर प्रचार के ज़रिये, कोई लोगों को स्वर्ग भी नर्क की तरह दिखाया जा  सकता है या एक बिलकुल मनहूस जीवन को स्वर्ग की तरह दिखाया जा  सकता है।



v  कोई इंसान बिना किसी कठिनाई के जीतता है तो यह केवल एक विजय है; लेकिन यदि कोई इंसान बहुत सी कठिनाइयों के बावजूद जीतता है तो यह इतिहास है।

v  यदि आप एक बड़ा झूठ बोलते हैं और उसे अक्सर बोलते हैं तो उस पर यकीन कर लिया जायेगा।

v  शक्ति बचाव में नहीं आक्रमण में निहित है।

v  लोगों का बड़ा समूह छोटे झूठ की अपेक्षा बड़े झूठ का आसानी से शिकार बन जाता है।



v  मुझे ये नहीं समझ आता कि इंसान प्रकृति के जितना ही क्रूर क्यों नहीं हो सकता।

v  नफ़रत नापसंदगी की तुलना में अधिक स्थायी होती है।

v  वो सत्य नहीं है जो मायने रखता है, बल्कि वो जीत है।

v  कितना भाग्यापूर्ण है उन सरकारों के लिए कि जिन लोगों पर वो शासन करते हैं वे सोचते नहीं।

v  शब्द अज्ञात क्षेत्रों में पुल का निर्माण करते हैं।

v  हमेशा ही विश्वास के खिलाफ लड़ना ज्ञान के खिलाफ लड़ने से अधिक कठिन होता है।

v  जो कोई भी आकाश को हरा और मैदान को नीला देखता या पेंट करता है उसे मार देना चाहिए।

v  चुनाव के माध्यम से एक महान व्यक्ति खोजने से पहले एक ऊंट सुई की आंख से निकल जायेगा।

v  केवल वही, जो युवाओं का मालिक होता है, भविष्य में लाभ उठता है।

v  सभी महान आन्दोलन लोक्रप्रिय आन्दोलन होते हैं। वे मानवीय जूनून और भावनाओं का विस्फोट होते हैं, जो कि विनाश की देवी या  लोगों के बीच बोले गए शब्दों की मशाल के द्वारा क्रियान्वित किये जाते हैं।

v  जर्मनी या तो एक विश्व-शक्ति होगा या फिर होगा ही नहीं।

v  मानवतावाद मूर्खता और कायरता की अभिव्यक्ति है।

v  सभी प्रचार लोकप्रिय होने चाहिए और इन्हें जिन तक पहुचाना है उनमे से सबसे कम बुद्धिमान व्यक्ति के भी समझ में आने चाहियें।

v  एक ईसाई होने के नाते मुझे खुद को ठगे जाने से बचाने का कोई कर्तव्य नहीं है, लेकिन सत्य और न्याय के लिए लड़ने का मेरा कर्तव्य है।

v  जनरलस सोचते हैं कि युद्ध मध्य युग की खेल-कूद प्रतियोगिताएं की तरह छेड़े जाने चाहिए। मुझे शूरवीरों का कोई काम नहीं है, मुझे क्रांतिकारी चाहियें।

v  व्यक्तिगत ख़ुशी के दिन बीत चुके हैं।

v  व्यापक जनसँख्या किसी और ताकत से अधिक भाषण की अपील के प्रति संवेदनशील होती है।

v  संघर्ष सभी चीजों का जनक है। जानवरों की दुनिया में इंसान मानवता के सिद्धांत से जीता या खुद को बचाता  आश्चर्य, भय, तोड़-फोड़, हत्या के ज़रिये दुश्मन को अन्दर से हतोत्साहित कर दो। यह भविष्य का युद्ध है।

v  यूनीवर्सल एजुकेशन सबसे अधिक नुक्सान पहुंचाने वाला ज़हर है जिसका उदारवाद ने अपने विनाश के लिए आविष्कार किया है।

v  मैं ज्यादातर लोगों के लिए भावना का प्रयोग करता हूँ और कुछ के लिए कारण बचा कर रखता हूँ।

v  अगर आज मैं यहाँ एक क्रांतिकारी के रूप में खड़ा होता हूँ तो यह क्रांति के खिलाफ एक क्रांतिकारी के खड़े होने के सामान होगा।

v  नेतृत्व की कलाएक एकल दुश्मन के खिलाफ लोगों का ध्यान संगठित करने और यह सावधानी बरतने में है कि कुछ भी इस ध्यान को तोड़ पाए।

v  किसी देश का नाश केवल जूनून के तूफ़ान से रोका जा सकता है, लेकिन केवल वो जो खुद जुनूनी होते हैं दूसरों में जूनून पैदा कर सकते हैं।

v  जो जीना चाहते हैं उन्हें लड़ने दो और जो अनंत संघर्ष वाली इस दुनिया में नहीं लड़ना चाहते हैं उन्हें जीने का अधिकार नहीं है।

v  जो कोई भी यूरोप में युद्ध की मशाल जलाता है वो कुछ और नहीं बस अराजकता की कामना कर सकता है।

v  किसी देश को जितने के लिए सबसे पहले उसके नागरिकों को काबू में करो।

v  पहले वो आपको इग्नोर करेंगे, फिर वो आप  हंसेंगे, फिर वो आप से लड़ेंगे, तब आप जीतोगे।

v  यदि आप जीतते है तो आप को कुछ भी एक्सप्लेन करने की जरूरत नहीं होती है लेकिन यदि आप हार जाते है तो आपको वहां एक्सप्लेन करने के लिए नहीं होना चाहिए।

v  मैं केवल उस चीज़ के लिए लड़ सकता हूँ जिसे मैं प्यार करता हूँ, उसे प्यार करता हूँ जिसे मैं आदर देता हूँऔर उसे आदर देता हूँ जो मैं जानता हूँ।

v  मेरा मानना ​​है कि आज मेरा आचरण सर्वशक्तिमान निर्माता की इच्छा के अनुसार है।

v  कोई भी निर्णय लेने के पहले हज़ारों बार सोचो पर एक बार निर्णय लेने के बाद कभी उसे मत पलटो चाहे इसके लिए आपको हज़ारों तकलीफे उठानी पड़े।